"तुम्हारे बारे में क्या कहूं कहने की जरूरत नहीं,

तुम हो प्रेम की सूरत कोई मूरत नहीं,

तुम ठहरी हुई जज्बात मेरी बदलती हुई मौसम नहीं,

जिसे मैं कहता फिरूं तुम कोई मुसीबत नहीं,

तुम हो इस जीवन की शीतल छइयां तुम्हें तीरथ कहूं तो सही,

स्वप्न में बस तुम ही आती यह है सही यह है सही,

हर मोड़ पर चलू साथ तेरे इस बात में और कोई बात नहीं,

समझता हूं हर जज्बात को मैं कहने की जरूरत नहीं,

मेरे हृदय की तुम दासी भी यह है सही यह है सही,

ये धरती तुम बिन प्यासी है कहने की जरूरत नहीं ।"