तुम सब ने क्या गुजारी गुजारी तो हमने थी,
कूद जाते थे हर सरहद दीवार और छते भी,
देखते ही देखते हम यमुना पार किया करते थे,
मात देते थे विरोधी को जब कुश्ती लड़ा करते थे,
नल को उखाड़ना क्या है हम जड़ को उखाड़ा करते थे,
काला नमक वाला चावल हम खुद ही कूट दिया करते थे,
सांवा कोदो तुम क्या जानो हम बलभर खाया करते थे,
व्हाट इज गर्लफ्रेंड हम बिन देखे बियाह कर लेते थे,
तुम भाग भाग ससुराल जाते हम कई सालों में एक बार जाया करते थे,
मेरे गांव के लोग हमें प्यार से पहलवान बुलाया करते थे ।
बुढ़ऊ पहलवान के जवानी के दिन❤️


