"सुनो गौर से चाहने वालों ,बहुत कुछ मैं बतलाऊंगा
अपने सारे किस्सों को सजा कर, महफिल में सुनाऊंगा
बिछड़े हुए लम्हों को, इकट्ठा कर दिखलाऊंगा
इश्क का मारा हु फिर भी, मैं इश्क ही लुटाऊंगा
प्यासे दिलों में आज, फसल लहराऊंगा
वादा है अंतिम में, लैला को ताज पहनाऊंगा !"


