"पतझड़ का जब मौसम आए पेड़ पौधे सब लहराएं,
पत्तियां धरती का चुम्बन मात्र झट से उतरकर नीचे आएं,
नए राग और नए उमंग में साज धाज को साथ में लाएं,
यह है दिलों का मौसम इसमें चले जो हवा दिलों को छू जाए,
तभी तो यह पावन मनभावन लुभावन मौसम कहलाए,
प्रेमी प्रेमिका के प्यार का मौसम यह इनमें उन्माद भर जाए,
बसंत के बहारों में पतझड़ का खुमार सात सुरों का संगम लाए,
कोयल कुहू कुहू सा आवाज बिखेर गुलशन में चार चांद लगाए,
यह है पतझड़ का मौसम जो जवानी को प्यार करना बतलाए,
लहर लहर लहराएं फसल और पेड़ों में भी जान भर जाए,
हवाएं शिखाओं को छुकरके कानों तक शोर मचाए,
पतझड़ का यह पावन मौसम रिमझिम रिमझिम प्यार भर जाए ।"


