
परियों सी है काया उसकी नजर से जलवे ढाती है,
दूर चांदनी खिल जाती है जब वो थोड़ा मुस्काती है,
बिन बादल बरसात होता जब वो जुल्फ गिराती है,
हरा भरा मोहल्ला हो
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परियों सी है काया उसकी नजर से जलवे ढाती है,
दूर चांदनी खिल जाती है जब वो थोड़ा मुस्काती है,
बिन बादल बरसात होता जब वो जुल्फ गिराती है,
हरा भरा मोहल्ला हो