मैं माटी से निकला हुआ, इक बरगद का पौधा हूँ

लिहाज मुझे इस माटी की, जिसके दम पर फैला हूँ


शुक्रगुजार इस माटी का, जिसने जीवन दान दिया,

जब तक जियूँ माटी की खातिर, इसने के सदियां मेरे नाम किया ।