"लपट जल रही है जो, सीने में उसे जलने दो
पीछे मुड़कर न देखो, पैरों को आगे बढ़ने दो
निडर रहो हर डगर पर, जो ठाने हो छू जाओगे
निश्चय ही विश्वास करो तुम, प्रतिद्वंदी को हराओगे
जीतने के लिए है दुनिया सारी, अगर हौसलों को बुलंद बनाओगे
तिनका तिनका सहारा बनेगा, लक्ष्य फतेह कर जाओगे
गर ठुकराया लक्ष्य को अपने, गिनती में ही रह जाओगे
भटक जाते हैं कई लोग यहां पर, तुम भी भटक जाओगे !"


