जोगनिया नयन न मारो री,

यू हमका अचरज में न डालो री,

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कई सपने बंधे हैं छूटि जइहें,

गर हम बिखरे तो ई टूटि जइहें,

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हे साथी तू हमका संभालो रे,

जोगनिया नयन न मारो री,

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अभी तो बसे हैं यूँ न उजारो री,

हमरी मड़इया पर बिजुली न गिराओ री,

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जरा सा मचलल ई मनवा हमार,

बीच धार में डूब जाई ई कश्ती हमार,

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हे साथी पतवार संभालो रे,

जोगनिया नयन न मारो री ।