जरा सा तू रुके अगर तो हाथ पकड़ तेरे साथ चलूं,
जैसे पानी पर नाव बहे मैं भी तेरे साथ बहूं,
नैनमटक्का इश्क विश्क करते हुए तेरे साथ चलूं,
मिले राह में धूप अगर तो मैं तेरे खातिर छाओं बनु,
तमाम उम्र तेरे खातिर मैं सजदा सौ सौ बार करूँ,
इतनी चाह है मुझमें तू मेरी पतवार बने मैं अपनी नैय्या पार करूं ।


