यूं लम्हा लम्हा तुम्हारे बगैर जीना सीख गया,
कांटों की बात छोड़ो शोलों से चलना सीख गया ।
------------------------------------------------------------
तुमने सोंचा था हम बिना पिए ही लड़खड़ा जायेंगे,
देखो मुझे लड़खड़ाने की खातिर पीना सीख गया ।
-------------------------------------------------------------
लगाया गले से जाम भीगना भी इसी से सीख गया,
डूबा रहता था जो कभी अब मैखाने तक चलना सीख गया ।
-------------------------------------------------------------
प्यासे नहीं है अधर मेरे इनसे जाम लगाना सीख गया,
दर्द नहीं है सीने में जबसे तुमको भूलना सीख गया।
--------------------------------------------------------------
खुश हूं मैं इसी की खातिर बस पल पल जीना सीख गया,
गम होगा तुम्हें अब तो मैं रात और दिन काटना सीख गया ।


