"इस धरती से होकर हर रोज गंगा बहती है,
वीरों की टोली कतारों में पैदल चलती है,
सिंहासन की चिंता तो सिर्फ राजा करता हैं,
हार जाने से मेहनतकश इंसान कहां डरता है ।"


"इस धरती से होकर हर रोज गंगा बहती है,
वीरों की टोली कतारों में पैदल चलती है,
सिंहासन की चिंता तो सिर्फ राजा करता हैं,
हार जाने से मेहनतकश इंसान कहां डरता है ।"