हम हर शाम उन गलियों में गुजारा करते थे,

अपने रूह के किस्से यारों से जताया करते थे,


तेरा जिक्र करते हुए जब हम खो जाया करते थे,

उतने में उन राहों से तू गुजर कर आती थी,


तो मेरे तमाम यार चुप हो जाया करते थे,

तुरंत छेड़ मुझे वो आयी आयी बताया करते थे ।