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दूर बरगद की शीतल छाँव में ,फिर उदास बैठी हो किनारे गांव में

दूर बरगद की शीतल छाँव में,
फिर उदास बैठी हो किनारे गांव में,

शायद याद हमारी आ रही होगी,
खुले केशों को तुम सजा रही होगी ,

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