बुलन्दी छूना लाजिम है मगर जमीन छूटने न पाए,
गोता लगाना लहरों में मगर साहिल दूर होने न पाए,
आंच आये जहां वसूलों पर भिड़ जाना वहां,
हा इतना ख्याल राखना प्रेम का तार टूटने न पाए ।


बुलन्दी छूना लाजिम है मगर जमीन छूटने न पाए,
गोता लगाना लहरों में मगर साहिल दूर होने न पाए,
आंच आये जहां वसूलों पर भिड़ जाना वहां,
हा इतना ख्याल राखना प्रेम का तार टूटने न पाए ।