भीगे साबुन की तरह फिसलती जा रही है,


ये जिंदगी भी हाथों से निकलती जा रही है,


पकड़ना अब बहुत मुश्किल हो गया है इसे,


संभालो यारों ये ऊंची इमारत अब ढहती जा रही है।