"अद्भुत लालिमाओं में, गूंज रहा मृदंग
नयन जगत में क्या ढूंढे,देख लालिमा रंग,
हे मानव तू चल, चला चल प्रकृति के संग
पकड़ प्रकृति की डोर अब, जैसे डोर से जुड़कर उड़े पतंग
अद्भुत अदम्य सा मनभावन है, मन में पुलकित करे उमंग
सांसारिक क्षण भर सुख को करता चल अब भंग ।"


