
किस्से अनगिनत, हजारों कहानियां
पर सुनने को हैं लोग कहां।
तुम आओगे, तो सब आएंगें
महफ़िल होगी, बांधूंगा समां।
पर खोखले हैं शब्द मेरे
किस्से, कविताएं, सब झूठी हैं
लेकिन बड़े ढोंगी हो तुम भी,
आे झूठ के व्यापारी।
सुनने - समझने का झूठ तो बोल ही लोगे।
Read More! Earn More! Learn More!
