जब हॉस्पिटल से घर लाया गया तब मां, हर तरफ सन्नाटा छा गया।
जिनके चेहरे रोज खिलखिलाते थे, वहां आज खामोशी का तूफान आ गया ।
तुम्हारे जाते ही, तुम्हारे कपड़े, तुम्हारी चारपाई, यहां तक की हमें भी तुमसे दूर कर दिया।
जो तेरे बच्चे कभी रोए नही थे, तूने जाके उनको रोने के लिए मजबूर कर दिया।
जिन बच्चों को तूने कभी धूप में निकलने पर डाटा होगा, वही आज तुझे सजाकर  धूप में ले जा रहे थे।
तेरे ही बच्चे , धीरे धीरे तेरा अस्तित्व मिटाने जा रहे थे।
जिन्हे बनाने में तेरा पूरा जीवन आग में जल गया, उन्होंने ही तुझे आज अग्नि शैय्या पर लिटा दिया।
हाथ भी नहीं कांपे तेरे सपूतों के, और कुछ मिनटों में तुझे भी जला दिया।
दो दिन बाद तेरी अस्थियां ले गए, और गंगा में बहाके, तेरा पूरा अस्तित्व ही मिटा दिया।
जब जिंदा थी , आजाद रखा , और अब कैद करके तस्वीर बना दिया।
तेरे जीवन भर के कर्मों का , उन्होंने ये फल चुका दिया।