⭐ मुझे उसकी याद आयी ।
बड़े दिनों बाद आई ।
खबर मिली थी वो तो खुश है मेरे बग़ैर ।
दर्दों से भरी शाम क्या गुज़री ।
अष्रो से भरी रात आयी ।।
⭐ लगता है भुला दिए हैं उसने वादे बफाई के।
अब घैरों को संदेशे देने की बात आई ।
मेरी कब्र में मेरी लाश हुई ख़त्म।
उसकी झोली में पूरी कायनात आई।
इश्क़ के खेल में अनजान हार गया ।
चांदनी रातों के बाद अंधेरी रात आई ।।
⭐ काफिले भी खाली थे तब उस दर के ।
दर उसके पर जब इश्क़ की मेरे फ़रियाद आई।
अब सुना है किस्से ख़त्म नहीं होते ।
उसके चाहने वालों के।
मेरी लाश क्या डूबी ।
उसकी सांसों में सांस आई ।।
⭐ मेरी खबर में मेरा नाम नहीं ।
उसकी कागज़ की नांव आई ।
अब पर्दा तो रुकसत हो चुका उसकी बफायी का ।
उसकी आंख तक ना नम हुई ।
मेरी आंसुओं की बरसात आई ।
लगता तबीयत ठीक नहीं खयालों की ।
महफ़िल मोहब्बत की सजी और इश्क़ की बात आई।
मुझे फिर उसकी याद आई ।
बड़े दिनों बाद आई ।।
:- सुधांशु कौशल
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