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तुम भी अकेली,मैं भी अकेला

 तू भी अकेली,मैं भी अकेला।


तुम गंगा की अर्पण हो,

तुम यमुना के तर्पण हो।

तुम हो,साजन के आंगन की कली

तुम तो महकती बगिया हो।।


मुझें पता है कि तुम मेरी नही हो,

फिर भी क्यों गीत लिख रहा हूँ मैं।

मुझे पता है कि तुम खुश हो अपना घर

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