ये दर्द तुम्हें भी होता है क्या

ये मर्ज़ तुम्हें भी होता है क्या

जब खुलता है नींद रात को

आंखों में आँसू होता है क्या


ये बैचैनी तुम्हें भी होता है क्या

ये घबराहट तुम्हें भी होता है क्या

जब जाते हो तुम घर अकेले

आँखों में आँसू होता है क्या


ये फिक्र तुम्हें भी होता है क्या

ये ज़िक्र मेरा भी होता है क्या

जब होते हो तुम महफ़िल में

याद मेरा भी आता है क्या


रातों को तुम भी रोते हो क्या

दिन में तुम भी हंसते हो क्या

थक कर जब आते हो घर में

तुम भी मुझको ढूँढते हो क्या