ए वक़्त ज़रा थम जा कुछ पल,
अब इतना भी ना मुझको छल,
दुनिया से पीछे छूट गया हूँ,
मुझसे क़दम मिलाके चल ।
बीता वक़्त कभी ना लौटा,
यादों से कर लूँगा समझौता,
हर कोई आगे चला गया है,
बस पीछे खड़ा हूँ मैं इकलौता ।
जो भी चाहा कर ना पाया,
सोचा आज का काम करूँगा कल,
वो कल कभी आया ही नहीं,
इस दर्द से कैसे जाऊँ संभल ?
ए वक़्त ज़रा थम जा कुछ पल,
अब इतना भी ना मुझको छल ।
- मुकुल मिश्रा
