गाँवों की अपेक्षा शहरों की सड़कें भरीं-भरीं, गलियाँ संकरी-अंधेरी और दिल खाली!

✍मुक्ता शर्मा त्रिपाठी 
हिन्दी अध्यापिका 
श इं ज सिं स मि स्कूल कोटला शर्फ़ बटाला