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दुष्ट संग जो हो लिए, चिंता मन कलपाय।

अच्छी संगत जो किए, मन निर्मल हो जाय॥



स्वांगी व्याभिचारी, भोगी करते जोग।

भले और संस्कारी, कम गिनती में लोग॥



धन दौलत की धौंस पर, कु-पात्र मुस्काए।

वहीं सुपात्र तड़प कर, अश्रुजल बरसाए।



बचपन जीवन ढो रहा, विधना भयी कठोर।

पग-पग चलना है कठिन, हृदय मचा है शोर॥



बोझिल नैना बावरे, बरसत बारम्बार।

दुख सागर में डूबते, नहीं मिली पतवार॥