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Poetry


न अदू से बात होती न विसाल ए यार होताये वो कैफ़ियत है जिसका न कोई इलाज़ होता

तिरा तीर गर जो ज़ालिम न जिगर के पार होतान यूँ रात ख़्वार होती न यूँ दिन ख़राब होता

Author:Dr Mukesh Nausran05/02/2026

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