न अदू से बात होती न विसाल ए यार होताये वो कैफ़ियत है जिसका न कोई इलाज़ होतातिरा तीर गर जो ज़ालिम न जिगर के पार होतान यूँ रात ख़्वार होती न यूँ दिन ख़राब होताAuthor:Dr Mukesh Nausran05/02/2026
न अदू से बात होती न विसाल ए यार होताये वो कैफ़ियत है जिसका न कोई इलाज़ होता
तिरा तीर गर जो ज़ालिम न जिगर के पार होतान यूँ रात ख़्वार होती न यूँ दिन ख़राब होता
Author:Dr Mukesh Nausran05/02/2026