Poetry 1 min read 199.6K reads

Poetry


जली कटी मुझे कह कर हताश करता हैबना के दिल मिरा पत्थर उदास करता है

फिरा के पीठ पर अब भी हथेलियाँ अपनीमिरे वज़ूद में साँसे तलाश करता है

Author : dr mukesh nausran03/01/2026

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