Poetry 1 min read 237K reads

Poetry


समझ सको तो इतना फ़क़त समझ लेनामैं ग़र ग़लत हूँ तुम भी ग़लत समझ लेना

धुले धुले से जो लफ़्ज़ ख़त में दिखते हैंये मुझ ग़रीब के दस्तख़त समझ लेना

dr mukesh nausran24/08/2025

Read more Earn more Learn more