Poetry 1 min read 318.8K reads

Poetry


मेरी ख़्वाहिश है जल्दी सीख लो चलना मेरे बच्चोन जाने कब कोई तूफ़ाँ उठे सब ख़ाक हो जाये

जिधर देखो उधर मंज़र तबाही का नज़र आयेहमारा शहर भी फिर आलम-ए-वीरान हो जाये

— dr mukesh nausran
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