धुआँ बनके कप से उड़े जा रहे होसुकूँ ज़ीस्त भर का लिए जा रहे होये माना के हमसे न आया मनानाभला आप क्यूँ अनमने जा रहे होdr mukesh nausran21/02/2025
धुआँ बनके कप से उड़े जा रहे होसुकूँ ज़ीस्त भर का लिए जा रहे हो
ये माना के हमसे न आया मनानाभला आप क्यूँ अनमने जा रहे हो
dr mukesh nausran21/02/2025