जो मैं रोऊँ याद में तेरी कभी इधर भी 

बहते होंगे आँख से आँसू तभी उधर भी 


जो मैं सोचूँ लौट के आना पास में तेरे 

बेचैनी  सी  होती  होगी तभी  उधर भी 


जिन रातों में याद तुम आयी बहुत ज़ियादा 

जाग के तुमने काटी होंगी  तभी उधर भी 


जब जब दिल ने याद में तेरी दस्तक दी है

इक आहट सी आयी होगी तभी उधर भी 


जो मैं सोचूँ बात भी करना कभी जो तुमसे 

इक  ख़ामोशी  टूटी  होगी  तभी  उधर भी 

Dr mukesh nausran 

04/12/2024