हमारे सामने रहता जुदा -जुदा सा हैज़मीं ये आसमाँ तुझसे कहीं मिला सा हैगुरेज़ाँ तो नहीं दिखता हमें अब वो लेकिनहमीं से जाने क्यूँ रहता खिँचा-खिँचा सा हैdr mukesh nausran23/10/2024
हमारे सामने रहता जुदा -जुदा सा हैज़मीं ये आसमाँ तुझसे कहीं मिला सा है
गुरेज़ाँ तो नहीं दिखता हमें अब वो लेकिनहमीं से जाने क्यूँ रहता खिँचा-खिँचा सा है
dr mukesh nausran23/10/2024