बिन पीये भी यार ख़ुमारी हो सकती है
जितना चाहो यार तुम्हारी हो सकती है
इश्क़ में जिसने रात गुज़ारी न हो रोकर
उसकी कितनी हिस्सेदारी हो सकती है
न हो करनी बात अगर तो सो जाते हैं
ऐसे भी तो रात- गुज़ारी हो सकती है
जिसको देखो वही लगा है बातें करने
इज़्ज़त इतनी भी बाज़ारी हो सकती है
Dr Mukeshnausran
01/10/2024

