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कहने से जो कुछ ज़बाँ डर रही थीख़ामोशी सब कुछ बयॉं कर रही थीआँसू हम उनसे छिपाते भी कैसेआँखें हक़ीक़त अयॉं कर रही थी01/09/2024

— dr Mukesh nausran
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