नाम लेता वो रहता था किसी का

कभी पूछो तो कुछ खुलता नहीं था

था एक रूमाल जिसे धुलता नहीं था

कुरेदो  तो  बताता  कुछ नहीं  था

एक  हँसी और बस लंबा ठहाका

मगर कुछ था जो अंदर जल रहा था

उसकी आँखों से धुआँ निकल रहा था

Dr mukesh nausran

18/06/2024