कोशिसे लाख करली क्यों फितरत मेरी जाती नहीं
दिल प्यार मुहब्बत की बात समझ मेरी आती नहीं
बदस्तूर ढूंढ़ता फिरता हूं मै फिर किसको इस तरह
जैसे छूट गई कोई डोर और डोर पकड़ आती नहीं
बात करू पुछ लू या सवालात करू तुझसे लेकिन
है बड़ी मुश्किल तबीयत तुझसे मेल मेरी खाती नही
थक कर लेट गए हू यूं तो फुरसत से कब्र में जाकर
एक नींद कि ख्वाहिश है और नींद है के आती नहीं
छोड़ दिया तोड़ दिया रूठ गया अब सब छूट गया
बस ये बात इतनी सी थी जो समझ मेरे आती नहीं
