जो चले गए जहाँ से, न मिलेंगे फिर दुबारा
जब तक हैं पास तेरे, इन का ही है सहारा
जब भी किसी से मिलना, गम अपने न सुनाना
तेरे गम की बात सुनना, हो न उसे गवारा
कोशिश यही तू करना, गम में शरीक होना
खुशियों में तो है होता, गैरों का भी सहारा
अगर हो सके तो अपने, ले साथ सब को चलना
जाने कब मिल ही जाए, तिनके का ही सहारा
न जाने कब आ जाए, तेरी राह में अँधेरा
गर्दिश में जब हो राहें, दिखता नहीं है तारा
सब को ही मान देना, रिश्ता हर इक है प्यारा
किसी एक को भी छोड़ा, शायद न हो गुज़ारा
* मुकेश निरुला *


