ये इन्सान ही इंसानियत नोचे जा रहा, एक दूसरे को नीचा दिखाए जा रहा, ख़ुद को ना सुधार, इल्ज़ाम लगाए जा रहा, समाज की दरिंदगी देख, कोई बदला है क्या ?