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अनकही दास्ताँ


आशाओं से भरी थी वो मुलाक़ातेंकुछ थी आहट, जो बयाँ करती थी वो बातें

सफ़र हमारा हो सकता था मीलों लंबाइसी उम्मींद में अब कट जाती हैं ये रातें।।

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