रक्षा का बंधन है बांधा, बहन ने भाई के हाथो पे ।
आजा भाई तू भी इक धागा, आज बांध दे मेरे हाथो पे ।
जैसे तू रक्षा को मेरी, सदा ही तत्पर रहता है ।
मेरी भी ऑखो मे सपना, तेरे शुभ का ही सजता है ।
जब भी तू मुझे पुकारे, साथ सदा ही पाऐगा ।
इस बंधन का सार प्रेम है, टूट कभी न पाऐगा ।
हर दिल जिस मै प्रेम बसा है, रक्षा का ये पर्व मनाऐ ।
इक दूजे का ध्यान रखे, प्रेम के धागो मे बंध जाए ।
कोई किसी को क्या देता है, कोई किसी से लेता क्या ।
प्यारी सी मुस्कान हो बिखरी, उसी मे मिल जाता है जहान ।
अटूट प्रेम के धागो से, आज बांध ले ये संसार ।
खुशियो का उमड़े है सावन, जब हो सब रिश्तो मे प्यार ।।