कभी -कभार जिम्मेदारी
खुद को  खुद
से भूला देती हैं,
खुद को खुद से जानने की
 आदत भूला देती हैं,
  बस होड़ होती हैं ,
  सपनों को पाने की ,
  मंजिल को छूने की,
हर रिश्ते को सच्चे मन से निभाने की,
पीछे छूट जाते हैंअपने, 
ना कोई साथ होता हैं
अपना कहने वाला,
जो समझ सके बातों की
गहराई को ,
आखिर निभाना ही होता हैं,  जिम्मेदारी को ।।
                
                    ✍️ Sumii.
 # poetry