हैं बंदिशें तुझ पर भी है बंदिशें मुझ पर भी
फिर क्यों पास आने की दिल में सुगबुगाहट है,

हार चुका हूं मैं खुद के ही सवालों से
फिर भी तुमसे पूछने की सुगबुगाहट है,

कह तो जाती है तेरी आँखें बहुत कुछ मुझसे
फिर क्यों शब्दों में पिरोने की सुगबुगाहट है।