आखिर ऐसा क्यों होना था?
मुझे गलत,
सही सभी को होना था?

सच कहने को उकसाया सब ने,
गलत मुझे ठहराया सब ने;
मैने तो सच ही बात कही,
नहीं किसी और की बात कही;
सच है कि सच में बात सही
कि सच ही अकेला होता है,
नहीं पक्ष किसी का लेता है,
नहीं बात किसी की कहता है;
शायद इसकी यह वजह रही,
क्यों बात किसी की मैने न कही;
पर मुझको तो सच ही कहना था,
आखिर ऐसा ही होना था,
मुझे गलत ,
सही सभी को होना था ।