पर स्त्री है विपदा भारी,पिटने की तुम करो तैयारी,मान भी खोवे धन भी खोवे,पर स्त्री के संग जो होवे,चंद क्षणों के सुख में अंधा,करे प्रेम का गोरखधंधा,अपनी स्त्री जो बिसरावे ,जग में प्रेम कहां वो पावे ।
पर स्त्री है विपदा भारी,पिटने की तुम करो तैयारी,
मान भी खोवे धन भी खोवे,पर स्त्री के संग जो होवे,
चंद क्षणों के सुख में अंधा,करे प्रेम का गोरखधंधा,
अपनी स्त्री जो बिसरावे ,जग में प्रेम कहां वो पावे ।