ओ चंदा! तुम नीचे आओ,

मेरे मामा बन कर आओ,

खेलो मेरे संग तुम खेल,

सखा मेरे अब तुम बन जाओ।


ओ चंदा! तुम नीचे आओ,

मेरी कुटिया में सो जाओ,

रात अंधेरी मेरे घर में,

तुम इसके दीपक बन जाओ।


ओ चंदा! तुम नीचे आओ,

आकर मुझको राह दिखाओ,

अंधकार है इस जंगल में,

मेरे मन के डर को मिटाओ।


ओ चंदा! तुम नीचे आओ,

शीतलता मुझको पहुँचाओ,

मैं चकोर प्यासा धरती पर,

मुझको तुम अब न तरसाओ।


ओ चंदा! तुम नीचे आओ,

प्रियतम जैसे बन कर आओ,

बिना दर्श के अँखियाँ तरसी,

उनकी सूरत तुम दिखलाओ।


ओ चंदा! अब ऊपर आओ,

आकर अपने दर्श दिखाओ,

निर्जल मैने व्रत है रखा,

प्रियतम की तुम उम्र बढ़ाओ।


ओ चंदा! अब आ भी जाओ,

मुझको अब तुम न तरसाओ ,

कब तक चंद्र में सूरत देखूँ,

तुम बिन अब मैं रह न पाऊँ।