तेरी झील सरीखी आँखों की

बस एक झलक ही काफी है,

हर शब्द में जैसे है मिश्री,

हैं केश घने जैसे बादल,

तू चले तो चलती मलय पवन,

रंगत में तेरे चांदी है,

तेरी झील सरीखी आँखों की

बस एक झलक ही काफी है;

मेरे पतझड़ जैसे जीवन में

तेरे बिना कोई बसंत नही,

तू मेरा सही या ना ही सही ,

तेरा होना ही काफी है;

तेरी झील सरीखी आँखों की

बस एक झलक ही काफी है ।