क्यों मैं नेह बढ़ाऊं तुमसेजब तुमको बिसराना ही है;कैसे मैं मन को समझाऊंतुम्हे एक दिन जाना ही है;तुम पंछी हो विटप डाल केतुम्हे तो घर को उड़ जाना है;मैं खग पंखहीन धरती परयहीं विचर कर सो जाना है।
क्यों मैं नेह बढ़ाऊं तुमसेजब तुमको बिसराना ही है;
कैसे मैं मन को समझाऊंतुम्हे एक दिन जाना ही है;
तुम पंछी हो विटप डाल केतुम्हे तो घर को उड़ जाना है;
मैं खग पंखहीन धरती परयहीं विचर कर सो जाना है।