कितनी मुश्किलें हैं राहों में

जाने में यार की बाहों में


चाहत तो बहुत है उनसे

मगर क्या करें चाहत से


मन तो भर जाएगा चाहत से

पर पेट भरेगा कैसे


पेट भरने के लिए तो खाना पड़ेगा

खाने के लिए भी कमाना पड़ेगा


हाय ये बेरोजगारी ये मुफ़लिसी का दौर

प्यार नहीं हो सकता अब और...



~सुरेश 'सागर'