मेरी बेबाकी को मेरी गलती मत समझना तुम,
मेरी चुप्पी को मेरी कमजोरी मत समझना तुम,
मेरे आत्मविश्व़ास से कभी मत टकराना तुम,
मेरे हौंसले को कभी कम मत आंक जाना तुम,
मैं प्रेम और ममता का वो सागर हूं,
जिसकी गहराई माप नहीं सकते तुम,
मैं दृढ़ अडिग और साहस की वो शक्ति भी हूं,
जिसका पार नहीं पा सकते तुम,
इसलिये मेरी आत्मा और विश्व़ास को छलनी कर,
अपने वज़ूद के मिटने का कारण मत बन जाना तुम।।
