रामायण का प्रमुख चरित्र है वो,
महापण्डित महाज्ञानी है वो,
पृथ्वी को भी हिला दे,
ऐसा महाबलशाली है वो।
ब्राह्मण कुल में जन्मा शिवभक्त है वो,
शास्त्रों का महान ज्ञाता रावण है वो,
लंका का वैभव बढ़ाने वाला है वो,
काल से भी न डरे ऐसा रावण है वो।
किन्तु अपनी ही शक्ति का उसे अभिमान हुआ,
जो रामायण का महाखलनायक बना,
घमण्ड में ऐसा अन्धा हुआ,
जो उसके ही विनाश का कारण बना।
सीता का उसने हरण किया,
श्रीराम से उसने बैर लिया,
पर त्रिकालदर्शी महाज्ञानी रावण था वो,
परमपिता 'विष्णु' है राम जानता था वो।
संसार से तरने का क्या मार्ग निकाला,
अपने बंधुओं को भी राम के हांथों मोक्ष दिलाया,
निःसंदेह इस उद्देश्य का मार्ग गलत अपनाया,
जिसका परिणाम भी उसने सर्वनाश पाया।
सत्य है अभिमानी खलनायक था रावण,
किन्तु वो बढ़ाता भी है राम का महत्व,
श्रीराम ने भी माना उसके महापाण्डित्य को,
जो लक्ष्मण को अन्तिम क्षणों में भेजा उससे ज्ञान प्राप्ति को।
मानव महामूल्यों का प्रतिरूप है रामायण,
तभी सत् उद्देश्य पूर्ण हेतु,
सन्मार्ग को ही उचित ठहराती रामायण,
जिसके इस महाउद्देश्य का उदाहरण बनता 'रावण'।।
