जिंदगी अब थोड़ा ठहर जा तू,   राहों में संग संग चलते हैं,   जिंदगी हाँथ बढ़ा भी दे तू,   आसमाँ में संग संग उड़ते हैं।   थके से लगे हैं मेरे ये नैन,   हो चले हैं अब ये भी बेचैन,   जिंदगी थोड़ा रहम दिखा दे तू,   इन आँसुओं को संग संग पोंछते हैं,   नैनों की गुजारिश सुन ले तू,   इनमें नयी आस संग संग भरते हैं।   हार सी गयी है मेरी ये जुबाँ,   सवालों जवाबों में हो चली है गुमशुदा,   जिंदगी थोड़ा सबर दिखा दे तू,   इन जवाबों को संग संग ढूंढ़ते हैं,   जुबाँ को सहारा दे भी दे तू,   इनमें लफ्जों की ताकत संग संग भरते हैं।   जिंदगी अब थोड़ा ठहर जा तू........